गुंडा दमन कानून लागू करने को लेकर आश्वस्त हैं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी
गुंडा दमन कानून लागू करने को लेकर मुख्यमंत्री आश्वस्त हैं। बिल का एक हिस्सा पहले ही विधानसभा में कानून के रूप में पारित हो चुका है और राज्य में लागू हो चुका है। इसके दूसरे हिस्से को लागू करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, नवान्न में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से बताया।
संविधान की अनुसूची 7 और अनुच्छेद 254(2) के तहत प्राप्त शक्तियों के आधार पर राज्य की ओर से गुंडा दमन कानून लाया गया है। इन्हीं शक्तियों के तहत बिल का एक हिस्सा पहले ही कानून के रूप में लागू किया जा चुका है, मुख्यमंत्री ने बताया।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बिल को गृह मंत्रालय भेजा गया है। किसी भी बिल के लिए राष्ट्रपति की सहमति लेने की प्रक्रिया में उसे गृह मंत्रालय के माध्यम से जाना पड़ता है।
इस मामले में बिल के दो हिस्से हैं। एक हिस्सा लागू हो चुका है, यानी प्रभावी हो चुका है। इसके तहत संपत्ति जब्त की जाएगी। ब्याज सहित तीन गुना राशि वसूल की जाएगी। हमने कई मामलों में कार्रवाई की है। आसनसोल में पुलिस चौकी में तोड़फोड़ के मामले में भी कार्रवाई की गई है।
दूसरा हिस्सा प्रिवेंटिव अरेस्ट यानी निवारक गिरफ्तारी से संबंधित है। बिल में कहीं भी ‘गुंडा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बिल पारदर्शी है और इसे पूरी तरह राज्य के अधिकार क्षेत्र के भीतर रहकर बनाया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि NDPS एक्ट में जो प्रावधान हैं, उनके तहत आंध्र प्रदेश और केरल ने NDPS के मामले में CrPC और IPC में संशोधन किए थे। इसलिए उन्होंने अपने बिल राष्ट्रपति के पास भेजे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां हमने तीन साल तक की सजा का प्रावधान रखा है और इसे गैर-जमानती रखा गया है। इसलिए इसे भेजा गया है। यह अभी तक राष्ट्रपति के पास नहीं पहुंचा है। यह केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास है। सरकार ने चर्चा की है। कानून विशेषज्ञों की राय और सलाह लेने का काम चल रहा है। यह गृह मंत्रालय की प्रक्रिया क




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