कलकत्ता हाई कोर्ट ने ISF की याचिका खारिज की, ‘लिफाफा’ चिन्ह पर ECI का फैसला बरकरार
कलकत्ता हाई कोर्ट ने नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव से पहले ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को दिए जाने के खिलाफ इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) की याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति कृष्णा राव की पीठ ने चुनाव आयोग के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया।
उत्तरबंग संवाद और अन्य ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ISF ने ‘लिफाफा’ चिन्ह के दोबारा आवंटन को चुनौती दी थी। ISF ने 2026 के विधानसभा चुनाव में इसी चिन्ह का इस्तेमाल किया था, जबकि उपचुनाव से पहले यह चिन्ह ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को दे दिया गया। ISF को इसके बदले ‘अलमारी’ चिन्ह मिला।
ISF का कहना था कि कुछ महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में उसने इसी चिन्ह पर चुनाव लड़ा था और उपचुनाव से पहले किसी दूसरी पार्टी को वही चिन्ह देने से मतदाताओं में भ्रम पैदा हो सकता है। चुनाव आयोग ने कहा कि ISF मान्यता प्राप्त राज्य या राष्ट्रीय पार्टी नहीं है और ‘लिफाफा’ एक फ्री सिंबल है, इसलिए उस पर ISF का आरक्षित अधिकार नहीं है।
28 सितंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। बाद के फैसले में अदालत ने चुनाव आयोग के चिन्ह आवंटन के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया और ISF की याचिका खारिज कर दी।
इस फैसले के बाद आगामी उपचुनावों के लिए चुनाव आयोग का चिन्ह आवंटन बरकरार है। नंदीग्राम और रेजिनगर में 6 अक्टूबर को मतदान निर्धारित है।
स्रोत: Uttar Banga Sambad। 30 सितंबर के ताजा अपडेट के लिए Indian Express Bangla की रिपोर्ट को भी क्रॉस-चेक किया गया है।




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