SIR पर विवाद के बीच चुनाव आयोग का दावा, सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए
भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) सहित आयोग के सभी फैसले तीन सदस्यीय आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए। दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों को लेकर रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद के बीच यह स्पष्टीकरण दिया गया।
23 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्टों में कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के नाम पर लिए गए कुछ फैसलों को लेकर कई बार आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्टों में फॉर्म 6 में बदलाव, ERONet नियंत्रण का केंद्रीकरण, पश्चिम बंगाल में मतदाता नाम हटाने से जुड़ी अपील और गोवा में पात्र मतदाताओं को जोड़ने जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया।
चुनाव आयोग ने क्या कहा
आयोग के सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयुक्तों की व्यक्तिगत राय या टिप्पणियां आयोग के औपचारिक निर्णय के बराबर नहीं होतीं। आयोग का कहना है कि SIR समेत सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की मंजूरी से लिए गए।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने कथित मतभेदों को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की और कुछ चुनावी फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कई विपक्षी नेताओं ने आयोग से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। कुछ नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।
यह विवाद देशभर में चल रहे SIR और मतदाता सूची में संशोधन को लेकर पहले से जारी बहस के बीच सामने आया है। पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के नाम हटाने और फिर बहाली से जुड़े विवाद भी इसी व्यापक संदर्भ का हिस्सा हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया लागू कानून और न्यायिक ढांचे के तहत की जा रही है।
मामला क्यों महत्वपूर्ण है
विवाद का मुख्य बिंदु आयोग की आंतरिक चर्चाओं में दर्ज व्यक्तिगत टिप्पणियों और आयोग के औपचारिक फैसलों के बीच अंतर को लेकर है। चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण और कथित आपत्तियों की रिपोर्ट अब मतदाता सूची पुनरीक्षण तथा चुनावी प्रशासन में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर चल रही व्यापक सार्वजनिक बहस का हिस्सा हैं।




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