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पार्क स्ट्रीट दूध विवाद: जनता दरबार में पहुंचीं महिला, सुवेंदु ने आवास का दिया भरोसा

लेखक की तस्वीर: Rashtrix News Desk
Rashtrix News Desk
26 अग॰
2 मिनट पठन
सॉल्ट लेक के जनता दरबार में सुवेंदु अधिकारी के साथ सीता देवी, पार्क स्ट्रीट फुटपाथ विवाद के केंद्र में रही महिला

पार्क स्ट्रीट के फुटपाथ पर बच्चे के लिए दूध गर्म करने के विवाद के केंद्र में रही महिला ने मंगलवार को सॉल्ट लेक में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के जनता दरबार में उनसे मुलाकात की। शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल के साथ उनकी बातचीत का वीडियो वायरल होने के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया था।

जनता दरबार में क्या हुआ?

सीता देवी बच्चे को गोद में लेकर जनता दरबार पहुंचीं और सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने परिवार के लिए रहने की व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया और फुटपाथ पर रहने के बजाय वैकल्पिक आवास की बात कही।

सुवेंदु का राजनीतिक आरोप

मुलाकात के बाद सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े लोगों ने महिला को भाजपा के खिलाफ बोलने के लिए पैसे देने की पेशकश की। यह मुख्यमंत्री का आरोप है और इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।

पार्क स्ट्रीट विवाद कैसे शुरू हुआ?

विवाद उस वीडियो के बाद बढ़ा जिसमें महिला को फुटपाथ पर बच्चे के लिए दूध गर्म करते देखा गया और अग्निमित्रा पाल उनसे सवाल करती नजर आईं। पाल ने बाद में कहा कि फुटपाथ पर स्टोव जलाने से सुरक्षा का खतरा था और यह भी माना कि उन्हें अधिक नरमी से बात करनी चाहिए थी।

ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने परिवार के लिए रहने, भोजन और बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था में मदद की पेशकश की थी। इसके बाद मामला बंगाल की राजनीति में एक बड़े विवाद का हिस्सा बन गया।

KMC ने आवास की दिशा में कदम उठाए

मंगलवार शाम को कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने महिला से बात की है और जल्द ही उसके सिर पर छत की व्यवस्था करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इससे राजनीतिक बयानबाजी के साथ पुनर्वास की प्रशासनिक प्रक्रिया भी सामने आई है।

बड़ा सवाल: फुटपाथ पर रहने वाले परिवारों का पुनर्वास

यह मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। इससे फुटपाथों को खाली कराने, सार्वजनिक सुरक्षा, पैदल चलने वालों के अधिकार और बेघर परिवारों के मानवीय पुनर्वास का सवाल भी उठता है। अब निगाह इस बात पर है कि परिवार को मिलने वाला आवास कितना स्थायी समाधान बनता है।

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