
अमेरिकी सामान पर कनाडा का पलटवार शुल्क, भारत के साथ बढ़ेगा व्यापार

वाशिंगटन के साथ व्यापार वार्ता विफल होने के बाद कनाडा ने अमेरिकी सामान पर नए जवाबी शुल्क का ऐलान किया है। इसी बीच प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत सहित एशिया के अन्य देशों के साथ व्यापारिक रिश्ते मज़बूत करने की तैयारी में हैं।
अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता टूटने के एक हफ्ते बाद कनाडा ने अमेरिकी सामान पर नए जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है। 8 सितंबर, 2026 से लागू होने वाला यह शुल्क लगभग 20 अरब डॉलर मूल्य के वार्षिक अमेरिकी आयात पर लगाया जाएगा। इस्पात, डेयरी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण और पल्प-कागज़ उद्योग पर 15 से 50 प्रतिशत तक शुल्क तय किया गया है।
यह घोषणा 21 अगस्त को वार्ता विफल होने के बाद आई है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि आखिरी समय पर वाशिंगटन द्वारा प्रस्तावित शर्तों में किए गए बदलाव "अनुचित और आर्थिक रूप से अव्यावहारिक" थे, जिससे किसी भी समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो गया। यह टूट उस समय हुई जब अमेरिका करीब 28 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने वाला था।
कार्नी ने कनाडा की प्रतिक्रिया के बारे में कहा, "जब आप पर हमला होता है, तभी आप युद्ध में होते हैं। हम पर हमला हुआ है।" वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन ने वार्ता टूटने पर सीधा बयान दिया, "अमेरिका ने ज़्यादा मांगा और कम दिया, इसलिए हमने कनाडावासियों के साथ खड़े होने का फैसला किया।" प्रभावित मज़दूरों और कारोबारियों के लिए कार्नी सरकार ने करीब 25 अरब डॉलर के अतिरिक्त सहायता पैकेज का भी वादा किया है।
अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार के साथ लंबे टकराव की आशंका के बीच कनाडा अपने विकल्प बढ़ाने में जुटा है, और इसमें भारत की भूमिका अहम होती जा रही है।
नए शुल्क में क्या-क्या शामिल है
लागू होगा: 8 सितंबर, 2026 से
मूल्य: लगभग 20 अरब डॉलर के वार्षिक अमेरिकी आयात पर
दर: क्षेत्र के अनुसार 15 से 50 प्रतिशत
क्षेत्र: इस्पात, डेयरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, पल्प व कागज़
सहायता: प्रभावित उद्योगों के लिए करीब 25 अरब डॉलर का अतिरिक्त पैकेज
वाशिंगटन के साथ वार्ता क्यों टूटी
नए शुल्क युद्ध को टालने के लिए दोनों देशों के बीच कई हफ्तों से बातचीत चल रही थी। कनाडा सरकार का कहना है कि आखिरी समय में वाशिंगटन द्वारा प्रस्तावित शर्तों में बदलाव के बाद ही वार्ता विफल हुई। कार्नी ने कहा, "जो उन्होंने पेश किया, हम उसे स्वीकार नहीं कर सकते, और जो वे मांग रहे हैं, वह हम नहीं देंगे।" इसके अलावा एक अलग व्यापार विवाद को लेकर अमेरिका की ओर से और अधिक शुल्क की धमकी ने भी हालात को जटिल बनाया।
भारत की ओर बढ़ता कनाडा
अमेरिका पर निर्भरता घटाने की बड़ी रणनीति के तहत प्रधानमंत्री कार्नी आने वाले दिनों में भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान की यात्रा पर जाएंगे। भारत यात्रा के दौरान वे मुंबई जाएंगे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कारोबारी नेताओं से मुलाकात प्रस्तावित है। इसका मकसद द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाना है।
2024 में भारत कनाडा का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। 2023 में कनाडाई धरती पर एक सिख कार्यकर्ता की हत्या से जुड़े आरोपों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में जो तनाव आया था, हाल के महीनों में उसे पीछे छोड़ते हुए बातचीत ने रफ़्तार पकड़ी है। कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद इस साल कई बार अपने भारतीय समकक्ष से मिल चुकी हैं।
कार्नी ने कहा, "एक अनिश्चित दुनिया में कनाडा उस पर ध्यान दे रहा है जिसे वह नियंत्रित कर सकता है। हम अपने व्यापार में विविधता ला रहे हैं और भारी नया निवेश आकर्षित कर रहे हैं।" उनकी सरकार ने अगले एक दशक में अमेरिका से इतर निर्यात दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल जवाबी शुल्क 8 सितंबर से लागू होंगे, लेकिन उससे पहले दोनों देश फिर बातचीत की मेज़ पर लौटेंगे या नहीं, यह अब भी अस्पष्ट है।

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