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जाति प्रमाणपत्र दोबारा सत्यापन पर कलकत्ता हाई कोर्ट की अंतरिम रोक

लेखक की तस्वीर: Rashtrix News Desk
Rashtrix News Desk
19 अग॰
1 मिनट पठन
कलकत्ता हाई कोर्ट और पश्चिम बंगाल जाति प्रमाणपत्र

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से जारी उस अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें राज्य में जारी जाति प्रमाणपत्रों के दोबारा सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। कानूनी चुनौती पर विचार के दौरान व्यापक सत्यापन अभियान पर फिलहाल रोक रहेगी।

मामला क्या है?

राज्य की अधिसूचना में 2011 के बाद जारी बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच का प्रावधान था। इस प्रक्रिया के दायरे और तरीके को लेकर अदालत में चुनौती दी गई।

अंतरिम रोक क्यों महत्वपूर्ण है?

जाति प्रमाणपत्र आरक्षण और कई वैधानिक लाभों से जुड़े होते हैं। अंतरिम आदेश का अर्थ है कि चुनौती दी गई सरकारी अधिसूचना को फिलहाल उसी तरीके से लागू नहीं किया जा सकता।

अब आगे क्या होगा?

मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में जारी रहेगी। अदालत अधिसूचना की वैधता और प्रमाणपत्रों की पुनःजांच की प्रक्रिया से जुड़े कानूनी सवालों पर विचार करेगी। यह अंतरिम आदेश अंतिम फैसला नहीं है।

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